Monday, November 19, 2012

क्या टाल सकते हो

क्या टाल सकते हो 

बला की लौ पर चढ़कर 
बला को टाल सकते हो,
मगर जो घाव बनेंगे, तुम 
उन्हें क्या टाल सकते हो।

जो आंसू बंद आँखों में 
निकलने की चाह रखते,
छुपा लो दामन में जितना 
उन्हें क्या टाल सकते हो।

गुजरता वक़्त भुला देगा 
के मंजर क्या हुआ होगा,
धुआं जो बंद दिल में है 
उसे क्या टाल सकते हो।

आईना मन बनाकर तुम 
खुदी को देख लो चाहे,
मगर लो लोग कहते हैं 
उसे क्या टाल सकते हो।
                                             - ख़ामोश 





आशा

आशा 

छलकती हुई 'आशा' 
उन मासूम आँखों से, 
बरशी हों आतुर 
कुछ छोटी चाहतों पर। 
के छलकी हो जैसे 
हरी 'ओंस' पत्तों से, 
जब हुआ नाच ले संग 
हवा का कोई सुर।
                                      - ख़ामोश 

वो संगीत जाने कहाँ है

  वो संगीत जाने कहाँ है 

वो संगीत जाने कहाँ है 
जिसे ढूँढता था मैं 
पानी की बूंदों में 
कभी बारिश में 
कभी छलकते कसोरों में।

वो संगीत जाने कहाँ है 
जिसे ढूँढता था मैं 
गाँव की गोरी की 
कभी चूड़ी में 
कभी पायल में।

वो संगीत जाने कहाँ है 
जिसे ढूँढता था मैं 
भोले बैलों की 
कभी घंटी में 
कभी हल में।

वो संगीत जाने कहाँ है 
जिसे ढूँढता था में 
किसी फ़क़ीर की 
कभी वीणा में
कभी चिमटे में।

वो संगीत जाने कहाँ है 
जिसे ढूँढता था मैं 
पानी के कुए की 
कभी रस्सी में
कभी बाल्टी में।

वो संगीत जाने कहा है 
जिसे ढूँढता था मैं
अपने पड़ोसिओं की 
कभी ख़ुशी मैं 
कभी प्रेम में।

वो संगीत जाने कहाँ है 
जिसे ढूँढता था मैं 
अपने गाँव की
कभी ठंडी सुबह में
कभी गोधुली बेला में।
                                         - ख़ामोश 

कागज का टुकड़ा

कागज का टुकड़ा 

मैं वो कागज का टुकड़ा हूँ 
दुनिया से रहा हूँ बेख़बर,
हवा के झोकों का साथ निभा 
उड़ता रहा हूँ इधर-उधर।

मैंने भी सोचा था कभी 
देगा नाम मुझको भी कोई,
चाह मैं भी हिऊंगा किसी की 
और कागजों को तराह।

उमीदों को गले से लगा 
गीले आसमां के तले,
गुजरते लम्हों के संग-संग  
अब फट सा गया हूँ मैं।
                                               - ख़ामोश 

कांश मैं होता वो शीतल जल

कांश मैं होता वो शीतल जल 

उन हिमालय की चट्टानों के 
ऊँचे शिखर पर, 
पिंघलती बर्फ का ठण्डा पानी 
करता हुआ कल-कल, 
कांश मैं होता वो शीतल जल।

ले संग कुछ कंकड़ पत्थर 
बनके झरना कोई तत्पर, 
हरी दिशाओं को कहता कहानी 
वो छनता हुआ ठंडा पानी, 
करता हुआ कल-कल, 
कांश मैं होता वो शीतल जल।

वो बहती छोटी सी धारा 
नाहता है जिसमें जग सारा, 
कुछ छंद मिले कुछ फूल मिले 
और सबके मन का मैल लिए, 
वो बहता हुआ ठंडा पानी 
करता हुआ कल-कल, 
कंश मैं होता वो शीतल जल।
                                                   - ख़ामोश 

एक दीप जलाना है

एक दीप जलाना  है 

आशा के चिरागों से 
कहीं दूर मुझे चलकर,
पलकों के झरोकों में 
एक दीप जलाना है।

ख्वाबों में गया हूँ बहुत 
मन के डगर से चलकर,
दिल से हो जुड़ा कोई 
एक ख्वाब बनाना है।

आँखों से रोये हैं बहुत 
हलकी सी चुभन लेकर,
यादों में बसा कोई 
एक दर्द जगाना है।

अपनों को चाह बहुत  
जीवन के सफ़र में चलकर,
रूह से हो जुड़ा कोई 
एक प्यार बसना है।
                                     - ख़ामोश 


तन्हाईयां

तन्हाईयां 

आज हमें तन्हाईयां 
उदास करतीं है,
आज हमनें लकीरों में 
तेरा चेहरा बनाया है।

अपने जज्बातों में सिमटकर 
छलकने को हैं आंखें,
अपनी दर्द-ए-मोहब्बत में 
दिल तड़पाया  है।

क्यूँ न कहें वक़्त को सितमगर 
सितम किये हैं हजार,
थोड़ी सी ख़ुशी दी क्या 
ग़म बरसाया है।

होंठ सिमटें हैं मोहब्बत में 
आह भर-भर कर,
'ख़ामोश' क्या कह सकेगा 
सिर्फ तेरा नाम आया है।
                                            - ख़ामोश