Monday, October 5, 2015

क्या इसके बाद सवेरा है.....!!







शब्दों की हेरा फेरी में,

 एक अनजान पहेली में, 

उलझे धागों में बंधी सी,

 जीवन की नोका अंधी सी,

 क्यूँ बेकार का डेरा है, 

क्या इसके बाद सवेरा है,

 ये पूछे आभा अंधी सी, 

मेरे जीवन की संगी सी।

                                              -ख़ामोश

Friday, April 17, 2015

मेरी प्यारी नन्ही परि ……!!


तितलिओं  के पँखों को लगाये
मेरी प्यारी नन्ही परि ,
बड़ी-बड़ी आँखों से मुझे देखती है
और नन्हे-नन्हे होटों से शायद मुझे बोलती है.....
मैं उड़ना चाहती हूँ पापा
दूर बादलों के बीच में,
और वहाँ एक रंगों का बिस्तरा बना
माँ की गोद में सोना चाहती हूँ.
मेरी नन्ही-नन्ही उंगलियाँ
इशारे तो नहीं कर सकती,
लेकिन दुनिया के सारे खिलौने
मैं अपनी मुट्ठी में पकड़ना चाहती हूँ.
मैं आपकी नन्ही परि
चारों तरफ रंग भरना चाहती हूँ.

                                                - अदिती के पापा 'ख़ामोश'